India Corruption Ranking; China Pakistan Singapore | Transparency Report: ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 11 फरवरी को 180 देशों की भ्रष्टाचार रिपोर्ट जारी की। भारत की रैंकिंग में गिरावट आई है। 2024 की सूची में यह 3 पायदान गिरकर 96वें स्थान पर आ गया है। 2023 में भारत 93वें स्थान पर था। इसका मतलब है कि हमारे देश में भ्रष्टाचार बढ़ा है।
India Corruption Ranking; China Pakistan Singapore | Transparency Report: पड़ोसी देश चीन 76वें स्थान पर बना हुआ है। इसकी रैंकिंग 2 साल से नहीं बदली है। वहीं पाकिस्तान में भी भ्रष्टाचार बढ़ा है। यह 133 से घटकर 135वें स्थान पर आ गया है। श्रीलंका 121वें और बांग्लादेश 149वें स्थान पर है।
India Corruption Ranking; China Pakistan Singapore | Transparency Report: डेनमार्क पहले नंबर पर बना हुआ है। वहां सबसे कम भ्रष्टाचार है। फिनलैंड दूसरे और सिंगापुर तीसरे स्थान पर है। जबकि साउथ सूडान (180) सबसे भ्रष्ट देश है।
India Corruption Ranking; China Pakistan Singapore | Transparency Report: जारी रैंकिंग में पहले नंबर पर मौजूद देश में सबसे कम भ्रष्टाचार है और 180वें नंबर पर मौजूद देश में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है।
भारत का स्कोर 38, 2023 में 39
India Corruption Ranking; China Pakistan Singapore | Transparency Report: मंगलवार को जारी रिपोर्ट में भारत का स्कोर 38 तय किया गया है। 2023 में यह स्कोर 39 और 2022 में 40 था। सिर्फ एक नंबर गंवाकर भारत 3 पायदान नीचे खिसक गया है।
India Corruption Ranking; China Pakistan Singapore | Transparency Report: वैश्विक औसत सालों से 43 बना हुआ है। जबकि दो तिहाई से ज्यादा देशों का स्कोर 50 से नीचे रहा है। इस इंडेक्स के लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के विशेषज्ञ हर देश के सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार का आकलन करते हैं।
इसके बाद हर देश को 0 से 100 के बीच स्कोर दिया जाता है। किसी देश में जितना ज्यादा भ्रष्टाचार होता है, उसे उतना ही कम स्कोर दिया जाता है। इसी आधार पर इंडेक्स में रैंकिंग तय होती है।
पीएम मोदी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ
अगर 2005 से 2013 तक की यूपीए सरकार और मौजूदा एनडीए सरकार की तुलना की जाए तो स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। 2006-07 में भ्रष्टाचार के मामले में रैंकिंग में जरूर सुधार हुआ है। उस दौरान भारत 70वें और 72वें स्थान पर था।
यूपीए शासन के आखिरी दौर यानी 2013 में भारत 94वें स्थान पर खिसक गया था। वहीं, एनडीए के कार्यकाल में सबसे अच्छी स्थिति 2015 में रही, जब भारत विश्व रैंकिंग में 76वें स्थान पर पहुंच गया था।
एशियाई देशों में भ्रष्टाचार की स्थिति को 2 बिंदुओं में समझें
पिछले 5 सालों में एशियाई देशों में सीपीआई स्कोर 45 के आसपास रहा है। इस साल यह 44 है। बहुत कम देशों में भ्रष्टाचार कम हुआ है। ज्यादातर एशियाई देशों में धीरे-धीरे भ्रष्टाचार बढ़ा है।
भारत समेत 71 एशियाई देशों का स्कोर यहां के औसत स्कोर (45) से कम है। रिपोर्ट का दावा है कि इन देशों के नेताओं ने भ्रष्टाचार के मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया है। साथ ही, इन देशों में स्वतंत्र प्रेस पर हमले भी हुए हैं। इससे भ्रष्टाचार के मामले बढ़े हैं।
भ्रष्टाचार जलवायु कार्रवाई के लिए बड़ा खतरा है
सीपीआई रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के हर हिस्से में भ्रष्टाचार एक खतरनाक समस्या है। शोध से पता चला है कि भ्रष्टाचार जलवायु कार्रवाई के लिए बड़ा खतरा है। यह उत्सर्जन को कम करने की प्रगति और वैश्विक तापन के अपरिहार्य प्रभावों में समस्याएँ पैदा करता है।
दरअसल, जलवायु नीतियों के लिए आवंटित धन भ्रष्टाचार के कारण सही जगह नहीं पहुँच पाता है, जिसके कारण परियोजनाएँ पूरी नहीं हो पाती हैं। 2012 से अब तक 32 देशों ने अपने भ्रष्टाचार के स्तर को काफी हद तक कम किया है। लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है। क्योंकि 148 देश इस दौरान अपनी स्थिति में स्थिर रहे हैं या उनकी स्थिति खराब हुई है।